Bihar Panchayat Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने अंतिम चरण तक पहुँच चुका है। नई सरकार का गठन हो चुका है और विभागों का बंटवारा भी पूरा हो गया है। 25 नवंबर को नयी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक होने जा रही है। लेकिन जैसे ही विधानसभा चुनाव समाप्त होते हैं, बिहार में एक और बड़ा चुनावी दौर शुरू हो जाता है—Panchayat Chunav। इसे लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव माना जाता है।
Bihar Panchayat Chunav और आरक्षण रोस्टर की सबसे बड़ी बहस
बिहार में पंचायत चुनाव आते ही सबसे ज़्यादा चर्चा आरक्षण रोस्टर को लेकर होती है। किस सीट पर कौन सा आरक्षण लागू होगा और कौन सा हटेगा—इसी पर पंचायत स्तर की राजनीति घुमती है। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही है।
जैसा कि हम जानते हैं, नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री बने हैं। उनके पहले कार्यकाल (2005-2010) में ही बिहार में पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया गया था। इसके अलावा कई सीटें SC-ST और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए तय की गई थीं।
अब फिर वही बहस तेज हो गई है—
इस बार कौन सी सीट आरक्षित रहेगी और कौन सी सामान्य हो जाएगी?
कौन सा पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा और कौन सा नहीं?
यह चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है।
बिहार में कब होंगे Panchayat Chunav? प्रशासन तैयारियों में जुटा
नई सरकार बनते ही प्रशासन ने Panchayat Chunav की प्रक्रिया पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पंचायत चुनाव की कार्यवाही दिसंबर महीने में शुरू होने की संभावना है। यानी चुनावी तैयारी का समय अब बहुत कम बचा है।
चूंकि पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर हर 10 सालों में बदलता है, इसलिए इस बार निश्चित रूप से कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
पिछली बार जिन सीटों पर आरक्षण था, वे इस बार सामान्य हो सकती हैं और जो सामान्य थीं, वे आरक्षित हो सकती हैं।
इस वजह से गांवों में चर्चा बेहद तेज हो चुकी है—
कौन चुनाव लड़ पाएगा और कौन नहीं?
किसके लिए रास्ता खुलेगा और किसके लिए बंद?
कौन-कौन से पदों पर होता है चुनाव?
बिहार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में एक ही समय में कई महत्वपूर्ण पदों के लिए मतदान होता है। इनमें शामिल हैं—
- जिला परिषद सदस्य
- मुखिया (ग्राम प्रधान)
- सरपंच
- बीडीसी सदस्य
- वार्ड सदस्य
- ग्राम कचहरी पंच
इन सभी पदों पर एक साथ मतदान होने के कारण पंचायत चुनाव अत्यंत व्यापक और महत्वपूर्ण माना जाता है।
गांव का बदलता चुनावी माहौल
विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड-तोड़ मतदान के बाद अब पंचायत स्तर पर भी माहौल बनने लगा है।
गांव के लोग चुनाव को लेकर वैसे भी काफी उत्साहित रहते हैं, क्योंकि पंचायत चुनाव सीधे उनके विकास और नेतृत्व से जुड़ा होता है।
महिलाएँ इस बार भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं जैसा कि विधानसभा चुनाव में ‘साइलेंट वोटर’ के तौर पर उन्होंने दिखाया। इसलिए पंचायत चुनाव में महिला भागीदारी बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
रोस्टर बदलने से बढ़ी उम्मीदें और चिंताएँ
सबसे बड़ा सवाल यह है कि किस पंचायत में कौन सा पद आरक्षित रहेगा और कौन सा सामान्य होगा।
अभी तक कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन चर्चा है कि पहले से आरक्षित पदों को इस बार सामान्य किया जा सकता है।
इससे कई नए चेहरे चुनाव में उतर सकते हैं और पुरानी सीटें नए लोगों के लिए खुल सकती हैं।
इसीलिए गांवों में राजनीतिक सक्रियता बढ़ चुकी है। लोग अपने क्षेत्र के आरक्षण की स्थिति जानने के लिए उत्सुक हैं, ताकि वे तैयारी शुरू कर सकें।
आपके विचार क्या हैं?
आप किस पंचायत से हैं?
आपके यहां कौन-कौन से पद आरक्षित हैं और कौन से सामान्य?
क्या आप चाहते हैं कि इस बार सीट सामान्य हो जाए ताकि सभी लोग चुनाव लड़ सकें?
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