बिहार में शिक्षकों के लिए नई शुरुआत: अब अपनी मर्जी से चुन सकेंगे स्कूल, ई-शिक्षा कोष पोर्टल से होगा ट्रांसफर

बिहार सरकार ने शिक्षकों के हित में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य में अब शिक्षक खुद अपने ट्रांसफर के लिए स्कूल चुन सकेंगे। शिक्षा विभाग की इस नई व्यवस्था को “ई-शिक्षा कोष पोर्टल” के माध्यम से लागू किया जाएगा, जिससे लाखों शिक्षकों को एक राहत की सांस मिलेगी। यह कदम न केवल शिक्षकों के वर्षों से चले आ रहे स्थानांतरण संबंधी असंतोष को दूर करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में नई ऊर्जा भी लेकर आएगा।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में बिहार के शिक्षकों को ट्रांसफर की प्रक्रिया को लेकर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कई शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापन स्थान से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेज दिया जाता था। इससे उन्हें परिवार से दूर रहना पड़ता था, लंबी यात्रा करनी होती थी और नए माहौल में सामंजस्य बैठाना भी मुश्किल हो जाता था। परिणामस्वरूप न केवल शिक्षक तनावग्रस्त होते थे, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी क्योंकि पुराने स्कूलों में शिक्षकों की जगह भरने में काफी समय लग जाता था।

इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने महसूस किया कि शिक्षकों को एक पारदर्शी, सरल और मानव-केंद्रित व्यवस्था दी जानी चाहिए, जिसमें वे खुद यह तय कर सकें कि उन्हें कहाँ काम करना है।

अब शिक्षक खुद कर सकेंगे ट्रांसफर का चयन

नई व्यवस्था में अब शिक्षक स्वेच्छा से अपने ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकते हैं और खुद स्कूल भी चुन सकते हैं। यह पारस्परिक स्थानांतरण (म्यूचुअल ट्रांसफर) प्रणाली पर आधारित है, जहाँ एक ही श्रेणी और विषय के शिक्षक आपसी सहमति से स्थान बदल सकेंगे।

ट्रांसफर पत्र
ट्रांसफर पत्र

इस प्रक्रिया में शिक्षक एक समूह बना सकते हैं, जिसमें 2 से 10 तक शिक्षक शामिल हो सकते हैं। ये सभी शिक्षक आपस में स्कूल बदल सकेंगे, बशर्ते सभी की सहमति हो। खास बात यह है कि अगर समूह का एक भी सदस्य योगदान नहीं करता है तो पूरे समूह का ट्रांसफर आदेश स्वतः रद्द हो जाएगा। इससे समूह में जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनी रहेगी।

कैसे काम करेगा ई-शिक्षा कोष पोर्टल?

ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल होगी। शिक्षक ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर लॉगिन करेंगे और वहां अपने विषय और श्रेणी के अनुसार जिले, प्रखंड या अनुमंडल में ट्रांसफर चाहने वाले अन्य शिक्षकों की सूची देख सकेंगे। इससे उन्हें उपयुक्त साथी शिक्षक तलाशने में आसानी होगी।

एक बार संभावित भागीदार मिल जाने पर, शिक्षक आपस में संपर्क करेंगे और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आधारित मोबाइल नंबर सत्यापन के माध्यम से अपनी सहमति देंगे। इसके बाद वे अपने पसंदीदा स्कूल का चयन करेंगे और ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर आवेदन करेंगे। आवेदन के केवल तीन दिनों के भीतर ट्रांसफर आदेश जारी कर दिया जाएगा।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रांसफर आदेश मिलते ही शिक्षकों को सात दिनों के अंदर अपने नए स्कूल में योगदान देना अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझे नहीं।

समयसीमा और विशेष प्रावधान

इस नई व्यवस्था की शुरुआत 10 जुलाई 2025 से की जाएगी और यह पूरे जुलाई महीने तक उपलब्ध रहेगी। यह एक विशेष अवसर है क्योंकि हाल ही में विभिन्न तिथियों को कई ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे कई शिक्षक प्रभावित हुए हैं। यह पहल उनके लिए राहत लेकर आई है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया में राज्य मुख्यालय या जिला स्थापना समिति की कोई भूमिका नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया शिक्षकों के लिए खुली और पारदर्शी रहेगी, जिसमें वे खुद अपना निर्णय ले सकेंगे।

शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा लाभ

यह व्यवस्था शिक्षकों के व्यक्तिगत जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाएगी। वे अपने परिवार के पास रह सकेंगे, तनाव कम होगा और काम में संतुष्टि बढ़ेगी। इससे उनके प्रदर्शन में भी सुधार होगा। वहीं, स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और स्थिरता बनी रहेगी, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो यह पहल सरकारी तंत्र पर ट्रांसफर से जुड़ी शिकायतों का बोझ कम करेगी और शिक्षा विभाग को एक प्रोएक्टिव और जवाबदेह इकाई के रूप में प्रस्तुत करेगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस नई योजना की जानकारी अधिक से अधिक शिक्षकों तक पहुँचाएँ, ताकि वे इसका लाभ उठा सकें और इस पहल को सफल बना सकें।

बिहार सरकार की यह पहल न केवल एक नीतिगत परिवर्तन है, बल्कि यह शिक्षकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह नीति दिखाती है कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए गंभीर भी। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक नई क्रांति ला सकती है।

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