बिहार शिक्षा विभाग ने 22 नवंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जो प्रदेश के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों की आपसी वरीयता, प्रमोशन और प्रधानाध्यापक नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को बदल देगा। यह आदेश 9 सितंबर 2025 को गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है और अब सभी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वरिष्ठता निर्धारण का नया ढांचा लागू हो जाएगा।
यह आदेश खास इसलिए है क्योंकि लंबे समय से शिक्षकों के बीच वरिष्ठता को लेकर विवाद हो रहे थे। अब यह प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक स्पष्ट, व्यवस्थित और पारदर्शी हो जाएगी।
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शिक्षकों की वरीयता कैसे तय होगी: नया आधार स्पष्ट
नए आदेश में वरीयता निर्धारण को लेकर कई स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों से शुरू करते हुए शिक्षा विभाग ने यह तय किया है कि यदि किसी विद्यालय में प्रशिक्षित शिक्षक या विद्यालयाध्यक्ष मौजूद नहीं है, तो ऐसे में नियुक्ति शिक्षक, विशेष शिक्षक और विद्यालयाध्यक्ष के बीच वरिष्ठता तय करने के लिए सामान्य मानक लागू होंगे। वरिष्ठता की पहली शर्त शिक्षक का अनुभव रहेगा, जिसमें अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग वर्षों का न्यूनतम अनुभव अनिवार्य है।
उदाहरण के लिए, माध्यमिक स्तर पर शिक्षक या विद्यालयाध्यक्ष के रूप में न्यूनतम आठ से नौ वर्ष का अनुभव होना चाहिए, जबकि उच्च माध्यमिक स्तर पर यह अनुभव दस से ग्यारह वर्ष तक होना आवश्यक है।
अनुभव समान होने की स्थिति में शिक्षा विभाग ने एक स्पष्ट और सरल नियम रखा है—जिस शिक्षक की जन्मतिथि पहले होगी, उसे वरिष्ठ माना जाएगा। यदि जन्मतिथि भी समान है, तो नाम को अंग्रेज़ी शब्दकोश क्रम में देखकर वरिष्ठता तय की जाएगी। यह नियम न सिर्फ निष्पक्ष है बल्कि भविष्य में होने वाले अधिकांश विवादों को भी खत्म करेगा।
प्राथमिक विद्यालयों के लिए नई वरीयता व्यवस्था
आदेश के दूसरे हिस्से में प्राथमिक विद्यालयों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिन प्राथमिक विद्यालयों में जिला संवर्ग के सहायक शिक्षक मौजूद नहीं हैं, उन स्कूलों में प्रधान शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2024 के तहत वरिष्ठता तय की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि प्रधान शिक्षक बनने की पात्रता के लिए कम से कम आठ वर्ष का अनुभव रखने वाले प्रशिक्षित और नियोजित शिक्षकों में से ही कार्यकारी प्रधानाध्यापक का चयन किया जाएगा।
यदि दो शिक्षक समान अनुभव रखते हैं, तो फिर वही नियम लागू होगा—जन्म तिथि पहले, तो वरिष्ठता पहले। जन्म तिथि समान होने पर नाम का क्रम देखा जाएगा।
मध्य विद्यालयों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश
मध्य विद्यालयों में भी शिक्षा विभाग ने वरिष्ठता तय करने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया लागू की है। यदि किसी विद्यालय में जिला संवर्ग का सहायक शिक्षक उपलब्ध नहीं है, तो प्रधान शिक्षक नियुक्ति एवं प्रमोशन नियमावली 2024 और राजकीय शिक्षक प्रमोशन नियमावली 2018 के तहत मानक तय किए जाएंगे।
यहां भी वही सबसे महत्वपूर्ण शर्त लागू है—न्यूनतम अनुभव और फिर जन्मतिथि के आधार पर वरिष्ठता तय की जाएगी। जिन मध्य विद्यालयों में केवल वर्ग 6 से 8 तक के शिक्षक तैनात हैं, वहां ऐसे शिक्षकों को कम से कम आठ वर्ष का अनुभव होना चाहिए। यदि विद्यालय में कोई पात्र शिक्षक उपलब्ध न हो, तो प्रशिक्षित शिक्षक, विशेष शिक्षक या विद्यालयाध्यक्ष को कार्यकारी प्रधानाध्यापक बनाया जा सकता है।
जन्मतिथि आधारित वरीयता: आदेश का सबसे निर्णायक नियम
पूरे आदेश में एक बात बार-बार दोहराई गई है—जहाँ भी दो शिक्षक अनुभव में बराबर हैं, वहां उनकी जन्मतिथि वरिष्ठता तय करने का मुख्य आधार होगी। यह नियम अत्यंत व्यावहारिक है, क्योंकि वर्षों से अनुभव समान होने पर विवाद खड़े होते रहे हैं।
यदि जन्मतिथि भी समान है, तो शिक्षक के नाम को अंग्रेजी शब्दकोश अनुसार क्रमबद्ध कर सीनियरिटी तय कर दी जाएगी। इस सरल प्रक्रिया से अब प्रमोशन, कार्यकारी प्रधानाध्यापक बनाने और जिम्मेदारी सौंपने में कोई अस्पष्टता नहीं रहेगी।
आदेश तुरंत लागू, अधिकारियों को मिली सख्त हिदायत
आदेश के अंतिम पेज में स्पष्ट लिखा गया है कि यह पूरी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। जिला शिक्षा अधिकारियों और सम्बंधित सभी प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश की प्रतिलिपि भेज दी गई है और निर्देश दिया गया है कि इसे बिना विलंब लागू किया जाए। यह भी कहा गया है कि आदेश को शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित करने की कार्रवाई भी की जाए।
शिक्षक समुदाय पर असर: क्या बदल जाएगा आगे?
नए नियमों से शिक्षा विभाग की प्रमोशन प्रणाली अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने जा रही है। वर्षों से शिक्षक समुदाय वरिष्ठता और प्रमोशन में अनियमितता की शिकायतें करता रहा है। यह आदेश उन सभी शिकायतों को काफी हद तक सुलझा देगा।
अब नियुक्ति शिक्षक, विशेष शिक्षक, प्रशिक्षित शिक्षक और विद्यालयाध्यक्ष सभी के लिए समान और स्पष्ट नियम निर्धारित हो गए हैं। इससे न सिर्फ उत्थान के अवसर निष्पक्ष होंगे बल्कि स्कूलों के दैनिक संचालन में भी सुधार आएगा। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाने में किसी तरह की देरी नहीं होगी, और स्कूल में नेतृत्व की स्थिति हमेशा स्पष्ट बनी रहेगी।
शिक्षा विभाग के इस आदेश से प्रशासनिक विवाद कम होंगे, फाइलों की आवाजाही घटेगी और प्रमोशन प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी हो जाएगी। कुल मिलाकर यह कदम बिहार की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है।
- बिहार शिक्षा विभाग आधिकारिक वेबसाइट
- https://www.biharvaibhav.com/wp-content/uploads/2024/12/वि-अध्यापक-2024.pdf




