शिक्षक नियुक्ति प्रमाण पत्र जांच :2006 से 2015 में नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्र अब भी अधूरे, शिक्षा विभाग ने जताई कड़ी नाराजगी
पटना।
बिहार में वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त हजारों शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने इस मामले में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (स्थापना) को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, निगरानी विभाग, अन्वेषण ब्यूरो द्वारा मांगे गए शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों से जुड़े फोल्डर अब तक पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिससे जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है।
निगरानी विभाग ने मांगे थे 69,809 फोल्डर
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि निगरानी विभाग, अन्वेषण ब्यूरो ने वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के कुल 69,809 फोल्डर मांगे थे। इन फोल्डरों में शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज और नियुक्ति से संबंधित कागजात शामिल हैं।


इन दस्तावेजों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक नियुक्ति पूरी तरह वैध प्रक्रिया के तहत हुई है या नहीं।
अब तक केवल 160 फोल्डर ही उपलब्ध
शिक्षा विभाग के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में मांगे गए फोल्डरों में से अब तक केवल 160 फोल्डर ही निगरानी विभाग को सौंपे गए हैं। यह आंकड़ा विभाग के लिए बेहद चिंताजनक माना जा रहा है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अभी भी 69,649 फोल्डर जांच एजेंसी तक नहीं पहुंच पाए हैं।
पहले भी जारी हो चुका है निर्देश
यह पहला मौका नहीं है जब शिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किया हो। इससे पहले भी विभागीय पत्रांक-37, दिनांक 12 जनवरी 2023 को सभी संबंधित जिलों को स्पष्ट आदेश दिया गया था कि मांगे गए फोल्डर शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं।
इसके बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर विभाग ने एक बार फिर सख्त लहजे में निर्देश दोहराया है।
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को चेताया
ताजा पत्र में प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि—
“वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों से संबंधित फोल्डर यथाशीघ्र निगरानी विभाग, अन्वेषण ब्यूरो को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।”
सूत्रों के अनुसार, इस बार निर्देश की अनदेखी करने वाले जिलों और अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
क्यों अहम है 2006–2015 का शिक्षक नियुक्ति काल?
बिहार में वर्ष 2006 से 2015 का समय शिक्षक नियुक्तियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की बहाली हुई थी।
हालांकि, समय-समय पर इन नियुक्तियों में—
- फर्जी प्रमाण पत्र
- प्रशिक्षण में गड़बड़ी
- नियमों की अनदेखी
जैसे आरोप सामने आते रहे हैं।
इसी कारण सरकार और निगरानी विभाग इस पूरे कालखंड की नियुक्तियों की गहन जांच कर रहा है।
जांच में देरी से बढ़ रही हैं मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर फोल्डर उपलब्ध नहीं होने से—
- जांच प्रक्रिया धीमी हो रही है
- दोषियों पर कार्रवाई में देरी हो रही है
- और ईमानदार शिक्षकों की छवि भी प्रभावित हो रही है
निगरानी विभाग के लिए बिना मूल दस्तावेजों के जांच आगे बढ़ाना लगभग असंभव हो जाता है।
फर्जी नियुक्तियों पर लगेगा ब्रेक?
सरकार का मानना है कि यदि सभी फोल्डर समय पर उपलब्ध करा दिए जाएं, तो
फर्जी शिक्षकों की पहचान संभव होगी
अवैध नियुक्तियों पर कार्रवाई हो सकेगी
और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी
यह कदम राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
सूत्रों के अनुसार, यदि आने वाले समय में भी फोल्डर उपलब्ध नहीं कराए गए, तो
संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है
विभागीय जांच बैठाई जा सकती है
और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है
शिक्षा विभाग इस पूरे मामले को अब गंभीरता से लेते हुए तेजी से निपटाना चाहता है।
2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच बिहार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। 69 हजार से अधिक फोल्डरों का अब तक उपलब्ध न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग के ताजा सख्त निर्देशों के बाद जिले कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और निगरानी विभाग को कब तक सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं।
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