कैसे बड़ी क्रिकेट फ्रेंचाइज़ियाँ टीम-चयन में नया Data Analytics और AI इस्तेमाल कर रही हैं
Data Analytics: आज के समय में क्रिकेट सिर्फ मैदान पर खेला जाने वाला खेल नहीं है। यह एक ऐसी दुनिया बन चुकी है जहाँ आंकड़े, स्क्रीन, सेंसर और कंप्यूटर मॉडल मिलकर बताते हैं कि कौन-सा खिलाड़ी टीम के लिए सबसे सही रहेगा। पहले टीम चयन का आधार खिलाड़ियों की प्रतिभा और स्कोरकार्ड हुआ करता था, लेकिन अब आधुनिक क्रिकेट में Data Analytics और AI (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
एक नए ब्लॉगर के नज़रिए से अगर इसे समझें, तो यह बदलाव कुछ वैसा ही है जैसे एक यूट्यूबर अपने वीडियो को बेहतर करने के लिए Analytics चेक करता है। क्रिकेट की फ्रेंचाइज़ी भी बिल्कुल इसी तरह हर डेटा का इस्तेमाल करती हैं ताकि टीम ज़्यादा मजबूत और प्रतिस्पर्धी दिखे।
Data Analytics आखिर है क्या?
साधारण भाषा में कहें तो Data Analytics का मतलब है—जो भी मैच, खिलाड़ियों, पिच, मौसम या फिटनेस से जुड़ा डेटा मिलता है, उसे कंप्यूटर की मदद से समझना और उसके आधार पर फैसले लेना।
अब फ्रेंचाइज़ियाँ खिलाड़ी के सिर्फ “कितने रन बनाए” पर नहीं देखतीं, बल्कि यह भी चेक करती हैं:
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किस गेंद पर खिलाड़ी ज़्यादा रन बनाता है
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किस पिच पर उसका प्रदर्शन कैसा रहा
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कौन-सा गेंदबाज़ उसे ज़्यादा परेशान करता है
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उसकी फिटनेस ग्राफ कैसा है
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पिछले 2–3 सालों में उसका प्रदर्शन कैसे बदल रहा है
ये सारी चीजें मिलकर तय करती हैं कि किसी खिलाड़ी को टीम में रखना चाहिए या नहीं।
बड़े फ्रेंचाइज़ी किस तरह Data Analytics का इस्तेमाल करती हैं?

1. ऑक्शन से पहले गहरी रिसर्च
आईपीएल ही सबसे अच्छा उदाहरण है। यहाँ हर टीम ऑक्शन से पहले डेटा टीम की रिपोर्ट पढ़ती है।
वे यह जांचते हैं—किस खिलाड़ी में भविष्य का star बनने के सबसे ज़्यादा चांस हैं, उसके रन कैसे आए हैं, क्या वह प्रेशर में भी अच्छा खेलता है, और क्या उसकी Playing Style टीम के सिस्टम में फिट बैठती है?
डेटा की इस रिसर्च के आधार पर टीम यह तय करती है कि किस खिलाड़ी पर कितना पैसा लगाना है।
बहुत बार ऐसा भी हुआ है कि कोई खिलाड़ी आम दर्शकों को उतना बड़ा नहीं लगता, लेकिन उसके Data Points इतने शानदार होते हैं कि टीमें उसे करोड़ों में खरीद लेती हैं।
2. मैच-अप्स की मदद से सही Playing XI चुनना
मैच-अप एक ऐसा शब्द है जो आज के टी20 क्रिकेट में बहुत सुना जाता है।
मैच-अप का मतलब है—किस बल्लेबाज़ के खिलाफ कौन-सा गेंदबाज़ बेहतर रहता है?
जैसे:
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कोई बल्लेबाज़ लेग-स्पिन पर आउट होता हो
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कोई बॉलर बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों पर ज़्यादा असरदार हो
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कोई खिलाड़ी शुरुआत के ओवर में संघर्ष करता हो
फ्रेंचाइज़ियाँ ये डेटा देखकर अपनी Playing XI तय करती हैं और पूरे मैच की रणनीति इसी आधार पर बनती है।
3. AI की मदद से हज़ारों मैचों की सिमुलेशन
अब AI सिर्फ चैटबॉट नहीं रह गया, बल्कि टीमों का “छुपा हुआ कोच” बन गया है।
AI एक मैच की हज़ारों वर्चुअल सिमुलेशन करता है जिसमें हर बार अलग Playing XI, अलग मौसम, अलग पिच और अलग रणनीति लागू की जाती है।
फिर यह बताता है—
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किन खिलाड़ियों के साथ जीतने के चांसेज़ ज़्यादा हैं
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किस ओवर में कौन गेंदबाज़ डाला जाए
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किस बल्लेबाज़ को किस नंबर पर भेजने से फायदा होगा
कोच AI के इन परिणामों को पढ़कर फैसले लेते हैं। यह ऐसा है जैसे टीम “भविष्य देखकर” रणनीति बनाती है।
4. फिटनेस और चोट की रोकथाम में डेटा की भूमिका
आज हर खिलाड़ी अभ्यास के दौरान GPS जैकेट पहनता है। इससे पता चलता है—
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उसने कितने किलोमीटर दौड़ा
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कितनी तेज़ दौड़ लगाई
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उसकी हृदय गति कितनी पहुँची
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उसका शरीर कितना थक चुका है
टीम की मेडिकल और एनालिटिक्स टीम इस डेटा की मदद से बताती है कि किसी खिलाड़ी को आराम चाहिए या नहीं।
इससे चोट का जोखिम काफी कम हो जाता है।
5. टैलेंट खोजने में डेटा की क्रांति
पहले स्काउट्स सिर्फ नज़र से खिलाड़ी को जज करते थे।
अब डेटा बता देता है—किस छोटे शहर या किसी लोकल टूर्नामेंट में कौन-सा खिलाड़ी छुपा हुआ स्टार बन सकता है।
फ्रेंचाइज़ी के पास एक पूरा डेटाबेस होता है जिसमें देश-दुनिया के हजारों खिलाड़ियों की जानकारी मौजूद रहती है।
AI इस डेटाबेस से उभरते हुए खिलाड़ियों को खोजने में मदद करता है।
टीम-चयन में इस्तेमाल होने वाले डेटा के प्रकार
एक नए ब्लॉगर की तरह समझाएँ तो डेटा कई तरह का होता है:
● मैच डेटा
रन, विकेट, स्ट्राइक रेट, इकॉनमी रेट, बाउंड्री प्रतिशत… आदि।
● वीडियो डेटा
AI वीडियो चैनल करता है और बताता है कि गेंद का मूवमेंट कैसे हुआ, बैट का स्विंग कैसा था, गेंदबाज़ किस लाइन लेंथ पर ज़्यादा सफल रहा।
● फिटनेस वर्कलोड डेटा
यह बताता है कि खिलाड़ी का शरीर कितना थक चुका है।
● पिच और मौसम डेटा
कौन-सी पिच बल्लेबाज़ी के लिए बेहतर है और कहाँ गेंदबाज़ी में मदद मिलेगी।
● मानसिक स्थिति (सॉफ्ट डेटा)
खिलाड़ी प्रेशर में कैसा खेलता है, क्या वह लगातार अपने प्रदर्शन को दोहरा पा रहा है।
क्या डेटा और AI पूरी तरह चयन को नियंत्रित कर लेंगे?
सच कहें तो नहीं।
AI आपको सुझाव दे सकता है, मॉडल दिखा सकता है, आंकड़े बता सकता है।
लेकिन मैदान पर खिलाड़ियों की मानसिकता, आत्मविश्वास, टीम के बीच तालमेल और कप्तान का अनुभव—ये सब चीजें डेटा नहीं माप सकता।
क्रिकेट अभी भी एक ऐसा खेल है जहां इंसानी फैसले सबसे महत्वपूर्ण रहते हैं।
AI उसका सहायक है, कप्तान नहीं।
Data Analytics की कुछ सीमाएँ
● छोटे फॉर्मेट में डेटा भ्रमित कर सकता है
T20 में दो-तीन मैचों के आंकड़े किसी खिलाड़ी को अच्छा या खराब दिखा सकते हैं।
● मानसिक पहलू हमेशा डेटा में कैद नहीं होता
कभी-कभी खिलाड़ी दबाव में टूट जाते हैं, कभी बेहतर खेल जाते हैं।
● डेटा में Bias भी हो सकता है
अगर किसी खिलाड़ी को बड़े मैच कम मिले हों तो उसका डेटा छोटा रह जाता है।
भविष्य का क्रिकेट — डेटा ही नई कोचिंग बनेगा
भविष्य में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग पूरी तरह डेटा-आधारित हो सकती है।
AI बताएगा कि कौन-सा शॉट खेलने पर आउट होने की संभावना ज़्यादा है या किस गेंद पर रन बढ़ेंगे।
हो सकता है आने वाले 5–7 साल में हर खिलाड़ी की Personal AI Profile हो—एक तरह का डिजिटल कोच।
क्रिकेट में डेटा एनालिटिक्स और AI ने खेल को एक नए युग में पहुँचा दिया है।
अब फ्रेंचाइज़ियाँ सिर्फ प्रतिभा नहीं बल्कि “डेटा-इंजीनियर्ड” टीम बनाती हैं।
ऑक्शन से लेकर प्लेइंग XI तक, सब कुछ गिनती और गणना से होकर गुजरता है।
एक नए ब्लॉगर के लिए यह समझना आसान है कि—
जैसे सोशल मीडिया पर Data Analytics आपकी रणनीति बदल देता है, बिल्कुल उसी तरह क्रिकेट में डेटा और AI टीमों की रणनीति बदल रहे हैं।
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Q1. क्रिकेट में Data Analytics क्यों ज़रूरी हो गया है?
क्योंकि यह टीमों को वैज्ञानिक आधार पर खिलाड़ियों की ताकत और कमजोरी समझने में मदद करता है।
Q2. क्या AI टीम का चयन खुद करता है?
नहीं। AI सिर्फ सुझाव देता है, अंतिम फैसला कोच और कप्तान लेते हैं।
Q3. डेटा फ्रेंचाइज़ियों को किस तरह मदद करता है?
ऑक्शन, मैच रणनीति, खिलाड़ी फ़ॉर्म, फिटनेस प्रबंधन और विपक्षी विश्लेषण में।
Q4. क्या डेटा गलत भी हो सकता है?
हाँ, अगर सैंपल साइज कम हो या Bias मौजूद हो तो डेटा भ्रमित कर सकता है।
Q5. भविष्य में क्रिकेट कैसा दिखेगा?
AI आधारित ट्रेनिंग, रियल टाइम एनालिटिक्स और पूरी तरह वैज्ञानिक रणनीतियों वाला क्रिकेट।
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