तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव: अब अनिवार्य होगा आधार वेरिफिकेशन, जानिए पूरा अपडेट

तत्काल टिकट

नमस्कार दोस्तों! अगर आप भी इंडियन रेलवे में तत्काल टिकट बुकिंग करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। जैसा कि आप जानते हैं, तत्काल टिकट बुक करना आज के समय में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने जैसा मुश्किल काम बन चुका है। सुबह 10 बजे एसी क्लास की बुकिंग हो या 11 बजे स्लीपर की, कन्फर्म टिकट मिल जाए, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होता। ऐसे में बहुत लोग शिकायत कर रहे थे कि जब तत्काल टिकट एजेंट्स के जरिए ही मिलना है और इसके लिए ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं, तो फिर यह सुविधा आम जनता के लिए कैसे रही?

तत्काल टिकट पर रेलवे का बड़ा कदम

इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग में एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब से तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार आधारित ई-ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इस बदलाव का मकसद है पारदर्शिता बढ़ाना, असली यात्रियों की पहचान सुनिश्चित करना और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना।

तत्काल टिकट बुकिंग का बैकग्राउंड

तत्काल टिकट बुकिंग उस स्थिति में की जाती है जब यात्रियों को अचानक यात्रा करनी होती है और उनके पास पहले से योजना बनाने का समय नहीं होता। ऐसे में थोड़ा अतिरिक्त भुगतान कर वे तत्काल कोटे से टिकट बुक करते हैं। यह एक लोकप्रिय विकल्प है, लेकिन बीते समय में इसमें बहुत गड़बड़ियां सामने आई थीं।

एजेंट्स और बॉट्स द्वारा टिकट बुकिंग के समय सिस्टम पर कब्जा कर लिया जाता था। वे फर्जी आईडी बनाकर टिकट पहले ही ब्लॉक कर लेते थे और बाद में आम यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क लेकर बेचते थे। कई बार तो फर्जी अकाउंट्स और फेक आईडी का इस्तेमाल कर ब्लैक मार्केटिंग की जाती थी।

क्या है नया नियम?

अब से जब आप IRCTC पर लॉगिन करेंगे और तत्काल टिकट बुक करना चाहेंगे, तो आपके पास दो विकल्प होंगे:

  1. या तो आपका IRCTC अकाउंट पहले से ही ई-आधार से वेरिफाइड हो,
  2. या फिर बुकिंग के समय OTP के जरिए ई-ऑथेंटिकेशन किया जाए।

अगर आपने इनमें से कुछ नहीं किया है, तो आप तत्काल बुकिंग ओपन होने के शुरुआती 10 मिनट तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। इन 10 मिनटों में केवल वही यात्री टिकट बुक कर सकेंगे, जिनका ई-आधार वेरिफिकेशन पूरा है। इसके बाद ही अन्य यूजर्स बुकिंग कर सकेंगे।

एजेंट्स और फर्जी खातों पर सख्ती

यह कदम उन एजेंट्स और बिचौलियों पर भी सख्ती लाने का काम करेगा जो पहले फर्जी आईडी बनाकर टिकटों की कालाबाज़ारी करते थे। IRCTC ने हाल ही में करीब 2.5 करोड़ फर्जी अकाउंट्स को डिएक्टिवेट किया है जो एजेंट्स द्वारा इस्तेमाल किए जाते थे। यह दिखाता है कि रेलवे अब गंभीरता से इस फर्जीवाड़े को खत्म करना चाहती है।

स्टेशन काउंटर पर भी लागू होगा नियम

यह नियम सिर्फ ऑनलाइन बुकिंग तक सीमित नहीं रहेगा। अगर आप स्टेशन के टिकट काउंटर से भी तत्काल टिकट लेना चाहते हैं, तो वहां भी KYC (Know Your Customer) फॉर्म भरना अनिवार्य होगा।

उद्देश्य: पारदर्शिता और सुरक्षा

रेलवे का उद्देश्य है कि हर यात्री की पहचान स्पष्ट हो और कोई फर्जी व्यक्ति टिकट बुक न कर सके। इससे न सिर्फ ट्रैकिंग आसान होगी बल्कि जिनके पास वाकई इमरजेंसी है उन्हें समय पर कंफर्म टिकट मिल पाएगा।

कब से होगा लागू?

यह नया नियम इस महीने के अंत तक लागू कर दिया जाएगा, संभवतः तीसरे या चौथे सप्ताह में। रेलवे का टेक्निकल पार्टनर CRIS (Centre for Railway Information Systems) इसे लागू करेगा और इसमें डेटा प्राइवेसी के सभी नियमों का पालन होगा।

अन्य बदलाव: वेटिंग टिकट पर भी कड़ा नियम

रेलवे ने हाल ही में यह भी तय किया है कि अब वेटिंग टिकट वाले यात्री ट्रेन में यात्रा नहीं कर सकेंगे। अगर कोई व्यक्ति वेटिंग टिकट के साथ यात्रा करता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। स्लीपर क्लास में ₹250 और एसी क्लास में ₹440 का फाइन भरना होगा। साथ ही, टीटीई को अधिकार दिया गया है कि वह यात्री को अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतार भी सकता है।

प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण की तैयारी

देश के बड़े रेलवे स्टेशनों जैसे नई दिल्ली, मुंबई सीएसएमटी, हावड़ा, चेन्नई सेंट्रल और बेंगलुरु में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अब केवल कन्फर्म टिकट धारकों को ही प्लेटफॉर्म पर एंट्री दी जाएगी।

भारतीय रेलवे की यह नई पहल डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे न केवल भ्रष्टाचार और ब्लैक मार्केटिंग पर लगाम लगेगी बल्कि यात्रियों को एक बेहतर और पारदर्शी सेवा का अनुभव मिलेगा। अगर आप तत्काल टिकट बुक करना चाहते हैं, तो अभी से अपना IRCTC अकाउंट आधार से लिंक करवा लें या ई-केवाईसी पूरा कर लें।

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