अमेरिका-ईरान टकराव का सबसे बड़ा मोड़: परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद क्या होगा?

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अमेरिका-ईरान टकराव : मध्य-पूर्व में तनाव ने रातों-रात एक नया आयाम ले लिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 22 जून 2025 की तड़के घोषणा की  21 जून की रात अमेरिकी वायुसेना ने इरान के तीन सबसे महत्त्वपूर्ण परमाणु स्थलों-फ़ोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान-को “पूरी तरह तबाह” कर दिया है। ट्रम्प के मुताबिक़, मिशन में B-2 स्टील्थ बमवर्षक और समुद्र से दाग़ी गई टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें लगीं, जिन पर “बंकर-बस्टर” वारहेड थे, यानी ऐसे बम जो पहाड़ी की गहराई में छिपे कंक्रीट सुरक्षा कवच को भी भेद सकें।

हमला कब और कैसे हुआ?

अमेरिकी समयानुसार शुक्रवार आधी रात के बाद, रणनीतिक कमांड से उड़ान भरकर दो B-2 “स्पिरिट” बमवर्षक फारस खाड़ी के ऊपर पहुँचे और बेहद निम्न ऊँचाई से छह GBU-57A/B “मसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर” बम गिराए। लगभग समान समय पर अरब सागर में तैनात विध्वंसक जहाज़ों से टॉमहॉक मिसाइलें नतांज़ और इस्फ़हान की ओर रवाना की गईं। इन हमलों की अवधि बमुश्किल 45 मिनट रही, पर असर ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया।

किन ठिकानों को निशाना बनाया गया?

फ़ोर्डो – क़ुम के पास पहाड़ियों के भीतर लगभग 300 फुट गहराई में बना यह यूरेनियम संवर्धन केंद्र इरान की “बाज़ी पलट” क्षमता माना जाता है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि बंकर-बस्टर सीधे लक्ष्य तक पहुँचे।
नतांज़ दशकों से चर्चा में रहा मुख्य संवर्धन परिसर, जहाँ सैंकड़ों सेंट्रीफ़्यूज भूमिगत हॉल में लगे हैं।
इस्फ़हान यहाँ का रूपांतरण संयंत्र ईंधन की निर्माण-श्रृंखला में अहम है।

हमलों से इन तीनों का ऊर्जा-आधार ठप करने की कोशिश की गई।

क्षति का शुरुआती आकलन

राष्ट्रपति ट्रम्प ने टीवी संबोधन में दावा किया कि “परमाणु संवर्धन की सारी क्षमता बिल्कुल नष्ट” हो गई। पर विशेषज्ञों का कहना है कि फ़ोर्डो जैसी गहराई में बनी सुरंगों को स्थायी रूप से नष्ट करना आसान नहीं। इरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने स्वीकारा कि हमले हुए, मगर “संवेदनशील सामग्री पहले से ही स्थानांतरित” कर दी गई थी। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने घटनास्थलों के आसपास रेडिएशन स्तर में कोई बढ़ोतरी नहीं पाई।

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जानिए कैसे अमेरिका ने इरान के फ़ोर्डो, नतांज़ व इस्फ़हान को निशाना बनाया, इरान की प्रतिक्रिया क्या रही और इस टकराव का क्षेत्रीय-वैश्विक असर कितना गहरा है।

इरान की फ़ौरी प्रतिक्रिया

हमले के कुछ ही घंटों के भीतर इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे “संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन” बताते हुए चेतावनी दी कि इसके “सनातन परिणाम” होंगे। तेहरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के “सभी विकल्प” खुला रखेगा। उसी रात इरान ने 40 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें इज़राइल पर दागीं; तेल अवीव और हाइफ़ा में कम से कम 27 लोग घायल हुए।

बदला लेने के इरानी विकल्प

सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार तेहरान के सामने तीन रास्ते हैं। पहला, तत्काल कूटनीतिक मोर्चा सँभालना और हमला न करना-लेकिन यह घरेलू मोर्चे पर कमज़ोरी का संकेत होगा। दूसरा, ताबड़तोड़ मिसाइल-ड्रोन हमलों से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना-पर इसका जोखिम है कि वॉशिंगटन कहीं बड़ा प्रतिघात न करे। तीसरा, कुछ समय बाद अचानक हमला करके चौंकाना-यह रणनीति अतीत में ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने अपनाई है। कौन-सा विकल्प चुना जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ़ होगा। फिलहाल शीर्ष नेतृत्व ने “धीमी किंतु निर्णायक” प्रतिक्रिया का संकेत दिया है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

पहली ही सुबह खाड़ी राज्यों में अमेरिकी वायुअड्डे उच्चतम सतर्कता पर चले गए। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने हवाई मार्ग परिवर्तित किए, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने मध्य पूर्व जाने वाली उड़ानें स्थगित कर दीं। विश्व बाज़ार में कच्चे तेल के दाम तुरंत पाँच प्रतिशत उछल गए; निवेशक सोने व डॉलर की ओर भागे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने इसे “ख़तरनाक उछाल” बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा, वहीं यूरोपीय संघ ने तुरंत वार्ता बहाल करने की अपील की।

अमेरिकी राजनीति में भूचाल

व्हाइट हाउस ने दावा किया कि हमले से पहले कांग्रेस नेतृत्व को “हेड्स-अप” दिया गया था, फिर भी कई सांसदों ने राष्ट्रपति पर बिना विधायी मंजूरी “नया युद्ध” छेड़ने का आरोप लगाया। सीनेट में रिपब्लिकन विभाजित दिखे टेक्सास के टेड क्रूज़ ने कार्रवाई को “देश की सुरक्षा हेतु आवश्यक” बताया, जबकि जॉर्जिया की कांग्रेसवुमन माजरी टेलर ग्रीन ने ट्वीट किया, “यह हमारी लड़ाई नहीं है।” डेमोक्रेट नेता हकीम जेफ़रीज़ ने “मध्य पूर्व में विनाशकारी युद्ध” की चेतावनी दी।

इज़राइल-ईरान संघर्ष की पृष्ठभूमि

13 जून को इज़राइल ने अचानक दर्जनों ईरानी ठिकानों पर हमला कर “परमाणु क्षमता को जड़ से खत्म” करने की बात कही थी। उसी के बाद से दोनों देशों में रॉकेट-ड्रोन हमले चलता आ रहे थे। अमेरिका ने तब तक सीधे सैन्य कदम नहीं उठाया था, मगर ट्रम्प ने दो दिन पहले इशारा दिया था कि यदि ईरान बात-ची त के लिए तैयार नहीं हुआ तो “कड़ी कार्रवाई” होगी और वह समयसीमा अप्रत्याशित रूप से दो दिन से भी कम निकली।

आगे की राह: कूटनीति या युद्ध?

व्हाइट हाउस ने साफ़ कहा है कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता तो “अगले हमले कहीं ज़्यादा भारी” होंगे। दूसरी ओर, तेहरान अंतरराष्ट्रीय विधियों की दुहाई देते हुए जवाबी विकल्पों पर विचार कर रहा है। कूटनीति की सारी खिड़कियाँ भली-भांति बंद नहीं हुई हैं—ओमान और क़तर जैसे देश मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं। सवाल यह है कि दोनों पक्ष एस्केलेशन के मौजूदा पथ से हटकर “डील” की मेज़ पर लौटेंगे या पूरा क्षेत्र एक और व्यापक युद्ध की दहलीज़ पर जा खड़ा होगा। फिलहाल सिर्फ इतनी बात तय है कि आगे के कुछ सप्ताह वैश्विक राजनीति और ऊर्जा-बाज़ार दोनों के लिए काफ़ी उथल-पुथल वाले रहने वाले हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या अमेरिका ने वाकई इरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया है?

हाँ, 22 जून 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने पुष्टि की कि अमेरिका ने  21 जून की रात इरान के फ़ोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान स्थित परमाणु ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। इस हमले में B-2 बमवर्षकों और टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ।

2. किन ठिकानों को निशाना बनाया गया था और क्यों?

फ़ोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान — ये तीनों इरान के प्रमुख परमाणु केंद्र हैं। अमेरिका का कहना है कि ये ठिकाने परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करने के लिए उपयोग में लाए जा रहे थे।

3. इरान की तरफ़ से क्या प्रतिक्रिया आई है?

इरानी विदेश मंत्री ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी कि इसका जवाब दिया जाएगा। उसी रात इरान ने इज़राइल के शहरों पर मिसाइलें दागीं, जिसमें कई लोग घायल हुए।

4. क्या ये हमला इरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर देगा

राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे “complete obliteration” कहा है, लेकिन IAEA और विशेषज्ञों का मानना है कि इरान ने पहले ही संवेदनशील सामग्री दूसरी जगह शिफ्ट कर दी थी। फ़ोर्डो जैसे गहरे बंकर को पूरी तरह तबाह करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

5. इस हमले के वैश्विक प्रभाव क्या हो सकते हैं?

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है, तेल की कीमतों में उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। निवेशक अस्थिरता को देखते हुए सोना और डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं।

6. क्या अब अमेरिका और इरान के बीच युद्ध होगा?

स्थिति बेहद तनावपूर्ण है, लेकिन यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि पूर्ण युद्ध शुरू होगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष कूटनीतिक रास्ते भी तलाश सकते हैं, खासकर अगर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता होती है।

7. इज़राइल की इस पूरे घटनाक्रम में क्या भूमिका रही?

इस तनाव की पृष्ठभूमि में इज़राइल द्वारा किए गए प्रारंभिक हमले थे। इज़राइल पहले ही कह चुका है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। अमेरिका का हमला भी उसी रणनीतिक सहयोग का हिस्सा माना जा रहा है।

8. क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कोई प्रतिक्रिया दी है?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सभी पक्षों से संयम की अपील की है। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने कूटनीतिक समाधान पर ज़ोर दिया है, जबकि वेंसुएला, क्यूबा और मेक्सिको जैसे देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है।

9. क्या ट्रम्प ने यह निर्णय अकेले लिया था?

रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कांग्रेस को सिर्फ़ सूचना दी थी, पर कोई औपचारिक मंजूरी नहीं ली। कई सांसदों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।

10. क्या आगे और हमले हो सकते हैं?

व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि अगर इरान ने प्रतिक्रिया दी तो आगे के हमले “और भारी” हो सकते हैं। इससे साफ़ है कि स्थिति अभी भी विस्फोटक बनी हुई है।

डिस्क्लेमर: यह लेख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों (Reuters, DW, Fox News आदि) तथा IAEA के आधिकारिक बयानों पर आधारित है। घटनाक्रम तेज़ी से बदल रहा है; कृपया नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों को भी अवश्य देखें।

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